हरियाणा में दिखेगा फेंगल तूफान का तगड़ा असर, सिरसा, हिसार समेत 17 जिलों में रेड अलर्ट, देखें कैसा रहेगा मौसम
Haryana Kranti, चंडीगढ़: दक्षिण भारत से उठा फेंगल चक्रवाती तूफान अब हरियाणा समेत उत्तर भारत के राज्यों में असर दिखा रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि आज से 1 दिसंबर तक हरियाणा के कई जिलों में घना कोहरा छाया रहेगा। इस दौरान विजिबिलिटी 50 से 100 मीटर के बीच रहेगी, जिससे वाहन चालकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
17 जिलों में कोहरे का रेड अलर्ट
हरियाणा के अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, पानीपत, सोनीपत, जींद, महेंद्रगढ़, सिरसा, हिसार, रोहतक, भिवानी, चरखी दादरी, झज्जर, रेवाड़ी, गुरुग्राम और फरीदाबाद में घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है। कोहरे के चलते सड़कों पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए वाहन चालकों को फॉग लैंप और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
प्रदूषण में मामूली गिरावट
पिछले 24 घंटों में हरियाणा के प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में मामूली सुधार देखा गया है। हालांकि कुछ शहरों में स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। बहादुरगढ़ का AQI 315 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। अन्य शहरों में गुरुग्राम 289, सोनीपत 288, बल्लभगढ़ 286, भिवानी 227, फरीदाबाद 215 और पानीपत 238 पर दर्ज हुआ। हल्की गिरावट के बावजूद प्रदूषण स्तर अभी भी सांस लेने के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
तापमान में वृद्धि, लेकिन ठंड का एहसास बरकरार
फेंगल तूफान के प्रभाव से तापमान में हल्की बढ़ोतरी हुई है। सिरसा जिले में अधिकतम तापमान 28.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 0.4 डिग्री ज्यादा है। वहीं, सोनीपत में न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस रहा। दिन में हल्की धूप के बावजूद सुबह और रात की ठंड बरकरार है।
वाहन चालकों के लिए विशेष चेतावनी
कोहरे के दौरान वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। IMD ने विशेष रूप से फॉग लैंप के इस्तेमाल और धीमी गति से वाहन चलाने की सलाह दी है। रात और सुबह के समय सड़कों पर विजिबिलिटी बेहद कम होगी, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है।
IMD की अपील: घर से बाहर निकलने में सतर्कता बरतें
मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि बहुत जरूरी न हो तो सुबह के समय यात्रा करने से बचें। कोहरे और प्रदूषण के चलते श्वसन से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है, खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए।