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Jewar Airport के बड़े प्रोजेक्ट्स नहीं पकड़ रहे रफ्तार, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के किसान कर रहे ये मांगे, जानें 

उत्तर प्रदेश सरकार नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में कई बड़े विकास प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है, लेकिन इस बीच किसानों की बढ़ती मांगें इन प्रोजेक्ट्स के लिए खतरे की घंटी बन गई हैं। जेवर एयरपोर्ट (Jewar Airport Update), फिल्म सिटी, न्यू नोएडा सिटी और गाजियाबाद की हरनंदीपुरम टाउनशिप जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर किसानों की मांगों के कारण असर पड़ सकता है।
 
Jewar Airport

Jewar Airport: उत्तर प्रदेश सरकार नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में कई बड़े विकास प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है, लेकिन इस बीच किसानों की बढ़ती मांगें इन प्रोजेक्ट्स के लिए खतरे की घंटी बन गई हैं। जेवर एयरपोर्ट (Jewar Airport Update), फिल्म सिटी, न्यू नोएडा सिटी और गाजियाबाद की हरनंदीपुरम टाउनशिप जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर किसानों की मांगों के कारण असर पड़ सकता है।

किसानों ने अपनी पुरानी मांगों के साथ-साथ कुछ नई डिमांड्स भी सामने रखी हैं, जो नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) और यमुना अथॉरिटी (Yamuna Authority) के लिए चुनौती बन गई हैं।किसानों ने भूमि अधिग्रहण के बदले 5 फीसदी विकसित प्लॉट देने के वादे को बढ़ाकर अब 20 फीसदी विकसित प्लॉट की मांग की है।

किसानों ने 1997 से लेकर अब तक अधिग्रहण की गई ज़मीन के बदले 10 फीसदी अतिरिक्त विकसित भूखंड और 64.70 फीसदी अधिक मुआवजे की मांग की है।किसानों ने नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत 4 गुना मुआवजा देने की भी मांग की है।

पिछले दो दिनों से किसान नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आंदोलन कर रहे हैं, और उनकी मांगों ने प्राधिकरणों के लिए समस्या खड़ी कर दी है। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के बदले उन्हें उचित मुआवजा और भूखंड मिलना चाहिए। किसानों का आरोप है कि पिछले 27 वर्षों में भूमि अधिग्रहण के बावजूद अधिकांश किसानों को उनके हिस्से का भूखंड नहीं मिला है।

पिछले 27 वर्षों में भूमि अधिग्रहण के दौरान जिन किसानों से ज़मीन ली गई थी, उनमें से केवल 16,500 किसानों को 5 फीसदी भूखंड मिले हैं। इसके अलावा 6,070 किसान अभी भी अपने भूखंड के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस स्थिति ने किसानों के बीच असंतोष और बढ़ा दिया है, और इस समय उनकी प्रमुख मांगों में ज़मीन का सही मूल्य और मुआवजा शामिल हैं।

यह प्रोजेक्ट नोएडा और आसपास के क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण इंजन साबित हो सकता है, लेकिन अगर किसानों की मांगें नहीं मानी गईं तो यह प्रोजेक्ट धीमा हो सकता है। इन बड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए भी किसानों के साथ समझौते की आवश्यकता होगी। अगर आंदोलन जारी रहता है तो इन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में देरी हो सकती है।