किसानों के विरोध के बावजूद उद्योग विभाग ने किया 500 एकड़ जमीन का अधिग्रहण, जानिए पूरा मामला
सूत्रों के अनुसार इस अधिग्रहण प्रक्रिया के तहत इन गांवों में सौ से अधिक किसानों की करीब 500 एकड़ से ज्यादा जमीन उद्योग विभाग को दी जाएगी। हालांकि किसान इसका विरोध कर रहे हैं। किसानों ने कहा है कि उन्हें न्याय मिलना चाहिए और सरकार द्वारा दिया जाने वाला मुआवजा उनके लिए पर्याप्त नहीं है। इसके बाद किसानों ने हाई कोर्ट जाने का फैसला किया है।
मध्य प्रदेश के कई गांवों में किसानों का विरोध होते हुए भी उद्योग विभाग ने रिफायनरी विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। भांकरई, आगासौद, दोनमड़ी, पुरैना और हांसुआ जैसे गांवों की करीब 500 एकड़ जमीन को अधिग्रहित किया जा रहा है। इसके तहत किसानों को स्वीकृत पत्र और नोटिस भेजे जा रहे हैं लेकिन अब किसान इसे लेकर न्यायालय जाने की योजना बना रहे हैं।
किसानों का विरोध और उनकी मांगें
सूत्रों के अनुसार इस अधिग्रहण प्रक्रिया के तहत इन गांवों में सौ से अधिक किसानों की करीब 500 एकड़ से ज्यादा जमीन उद्योग विभाग को दी जाएगी। हालांकि किसान इसका विरोध कर रहे हैं। किसानों ने कहा है कि उन्हें न्याय मिलना चाहिए और सरकार द्वारा दिया जाने वाला मुआवजा उनके लिए पर्याप्त नहीं है। इसके बाद किसानों ने हाई कोर्ट जाने का फैसला किया है।
किसानों की मुख्य मांग यह है कि उन्हें मुआवजे के रूप में 50 लाख रुपये प्रति एकड़ मिले और उनके परिवार के किसी सदस्य को स्थायी रोजगार की गारंटी दी जाए। इसके अलावा स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधा भी प्रदान की जाए। इन गांवों में कुछ किसान तो ऐसे हैं जिनकी पूरी ज़मीन चली जाएगी, जिससे वे केवल अपने घर को ही बचा पाएंगे। लेकिन इस स्थिति में भी सरकार द्वारा निर्धारित मुआवजा उन्हें अपनी जमीन फिर से खरीदने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।
भांकरई गांव के किसान की चिंता
भांकरई गांव के किसान जितेन्द्र सिंह ने बताया कि उनकी 28 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाएगी। यदि यह जमीन चली जाती है, तो केवल उनका घर बच जाएगा। जितेन्द्र सिंह और अन्य किसानों का कहना है कि उन्हें मुआवजा मिलने के बाद भी आसपास की ज़मीन में नए घर और खेत नहीं खरीद पाएंगे। इस स्थिति में उनके पास आजीविका का कोई साधन नहीं बचेगा और वे गांव में क्या करेंगे, यह सवाल उठता है।
किसान यह भी मांग कर रहे हैं कि उन्हें मुआवजा उनकी ज़रूरतों के हिसाब से मिलना चाहिए, ताकि वे दूसरे स्थानों पर घर और जमीन खरीद सकें। भांकरई गांव में जमीन के मालिक मुलायम सिंह, वीरसिंह, राजाभाई, नरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, बलराम सिंह, संतराम सिंह, रामस्वरूप, रामदास अहिरवार, रामबकील और मीरा बाई जैसे किसान हैं। अन्य गांवों में भी यही स्थिति है, जहां किसानों की पूरी जमीन को अधिग्रहित किया जा रहा है।
किसानों के मुआवजे और रोजगार का मुद्दा
पूर्व में जिन किसानों ने रिफायनरी के लिए अपनी ज़मीन दी थी, वे अब यह आरोप लगा रहे हैं कि उनके परिवार के किसी सदस्य को स्थायी नौकरी नहीं मिली है। इन किसानों का कहना है कि अगर उन्हें रोजगार की गारंटी दी जाती, तो वे इस भूमि अधिग्रहण से संतुष्ट होते। इसके बावजूद, किसान न्याय के लिए उच्च न्यायालय का रुख अपनाने की तैयारी कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी हाल ही में किसानों से मुलाकात की थी। उन्होंने किसानों के मुद्दों को सुना और इस बात का आश्वासन दिया कि मुआवजे के मामले में सुधार किया जाएगा। हालांकि, किसानों ने यह भी बताया कि 55 पट्टेधारियों में से 11 को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है, जिससे उनकी परेशानियाँ और बढ़ गई हैं।
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