हरियाणा में HKRN के तहत की गई नियुक्तियों पर लटकी तलवार, हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस, जानें पूरी डिटेल

Haryana Kranti, चंडीगढ़: हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड (HKRNL) के तहत अनुबंध आधार पर की गई सरकारी नियुक्तियां विवादों में घिर गई हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मसले पर हरियाणा के मुख्य सचिव और निगम के अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में आरोप लगाया है कि यह नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना करते हुए की गई हैं।
अवमानना याचिका पर हाई कोर्ट का सख्त रुख
मामला तब गरमाया जब जस्टिस हरकेश मनुजा की अध्यक्षता में मंगलवार को जगबीर मलिक द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दावा किया कि हरियाणा सरकार ने नियुक्तियों में कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया। 2004 के सज्जन सिंह बनाम हरियाणा सरकार केस में दिए गए निर्देशों के मुताबिक, सरकार और उसके विभागों को दैनिक वेतन या अनुबंध आधार पर नियुक्तियां करने से रोका गया था। इसके बावजूद HKRNL के माध्यम से लाखों पदों पर नियुक्तियां की जा रही हैं।
क्या है HKRNL और क्यों हो रहा विवाद?
HKRNL की स्थापना हरियाणा सरकार ने राज्य में अनुबंध आधारित रोजगार के प्रबंधन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए की थी। इसका उद्देश्य था बिना किसी भ्रष्टाचार के युवाओं को रोजगार देना। लेकिन हालिया घटनाओं ने इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने प्राथमिक शिक्षक (PRT), प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT), स्नातकोत्तर शिक्षक (PGT), जूनियर इंजीनियर (JE), लैब तकनीशियन, और नर्सिंग स्टाफ जैसे पदों पर बड़ी संख्या में अनुबंध नियुक्तियों के लिए आवेदन मांगे हैं।
सार्वजनिक रोजगार में तदर्थवाद पर सवाल
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि सार्वजनिक पदों पर तदर्थवाद को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने समय-समय पर स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इस मुद्दे पर कोर्ट का रुख हमेशा स्पष्ट रहा है कि नियुक्तियां संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए। इसके बावजूद, राज्य सरकार ने इन निर्देशों को नजरअंदाज कर लाखों पदों पर नियुक्तियां की हैं।
नियुक्ति प्रक्रिया पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
पारदर्शिता की कमी: नियुक्तियों के लिए विज्ञापन प्रक्रिया और पात्रता मानकों को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं है।
कोर्ट निर्देशों की अनदेखी: 2004 में हाई कोर्ट के आदेशों के बावजूद, अनुबंध आधार पर नियुक्तियों को लेकर सख्त नियमों का पालन नहीं किया जा रहा।
विधिक मान्यता पर संदेह: सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन का मामला सामने आने के बाद नियुक्तियों की वैधता सवालों के घेरे में है।
मुख्य सचिव और निगम अधिकारियों से मांगा गया जवाब
हाई कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव और HKRNL के सह-अध्यक्ष विवेक जोशी और सीईओ अमित खत्री को नोटिस भेजकर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। कोर्ट का कहना है कि यह स्पष्ट किया जाए कि इन नियुक्तियों में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन क्यों नहीं हुआ।
राजनीतिक माहौल गरमाया
इस मसले पर विपक्ष ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के नाम पर संवैधानिक प्रक्रिया की अनदेखी कर रही है।
आगे क्या होगा?
हाई कोर्ट की सुनवाई और अधिकारियों के जवाब के बाद ही तय होगा कि इन नियुक्तियों पर अंतिम फैसला क्या आएगा। इस बीच, राज्य के लाखों युवाओं की नजर इस फैसले पर टिकी है।