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अब नहर के जैसा होगा ट्यूबवेल का पानी, अपनाएं ये तरीका; बढ़ेगा उत्पादन

 
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Haryana Kranti, kheti Kisan: किसानों के लिए सिंचाई का पानी उनकी फसलों की गुणवत्ता और उपज को सीधे प्रभावित करता है। सिंचाई में सही पानी का चयन और सही तरीके से उपयोग मिट्टी की सेहत को बनाए रखने में बेहद महत्वपूर्ण है। भारत में नहरों के पानी की उपलब्धता घटने के कारण ट्यूबवेल के पानी का उपयोग बढ़ा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ट्यूबवेल का पानी आपकी मिट्टी के लिए नुकसानदायक हो सकता है?

आज हम जानेंगे कैसे ट्यूबवेल के पानी का सही तरीके से उपयोग किया जाए ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और फसलों की पैदावार में बढ़ोतरी हो।

नहर बनाम ट्यूबवेल का पानी: कौन है बेहतर?

नहर का पानी पारंपरिक रूप से फसलों के लिए बेहतर माना जाता है। इसमें खनिजों का सही संतुलन होता है, जिससे मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है। नहर के पानी से सिंचाई के बाद खेत में 15 से 25 दिनों तक नमी रहती है, जबकि ट्यूबवेल का पानी अधिक लवणीय होता है और 3-4 दिनों में ही नमी समाप्त हो जाती है।

ट्यूबवेल का पानी मिट्टी को कठोर और क्षारीय बना सकता है। यह मिट्टी की पोषक तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता को भी कम करता है। इससे न केवल मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती है, बल्कि फसल की पैदावार भी प्रभावित होती है।

समस्या का समाधान: कैसे करें ट्यूबवेल के पानी का सही उपयोग?

जिप्सम का उपयोग करें

जिप्सम का उपयोग ट्यूबवेल के पानी की लवणीयता को कम करने का एक शानदार उपाय है।

पहले वर्ष: खरीफ और रबी फसलों के दौरान प्रति एकड़ 4 बैग जिप्सम डालें।

दूसरे और तीसरे वर्ष: प्रति सीजन 3 बैग जिप्सम का उपयोग करें।

4-5 साल तक जिप्सम का निरंतर उपयोग करने से मिट्टी की संरचना में सुधार होता है। यह पीएच को संतुलित रखता है और फसलों की जड़ों को मजबूती प्रदान करता है।

जैविक खाद और वेस्ट डीकंपोजर का उपयोग करें

जैविक खाद जैसे गोबर की खाद, जीवामृत और वेस्ट डीकंपोजर मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाते हैं।

खेत में फसल अवशेषों को मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है।

जैविक खाद न केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधारती है बल्कि उत्पादन को भी बढ़ावा देती है।

सल्फर आधारित उर्वरकों का उपयोग

मिट्टी के पीएच स्तर को नियंत्रित करने के लिए सल्फर आधारित उर्वरकों का उपयोग करें। यह मिट्टी को पोषण संतुलन प्रदान करता है। मैग्नीशियम क्लोराइड भी कठोर मिट्टी को नरम बनाने में सहायक होता है।

सिंचाई का सही तरीका: पानी को मिलाकर करें उपयोग

नहर और ट्यूबवेल के पानी को मिलाकर सिंचाई करने से मिट्टी पर खारे पानी का असर कम हो जाता है। यह फसलों के लिए पोषक तत्वों की उपलब्धता बनाए रखने में मदद करता है।

जैविक कार्बन: मिट्टी की जान

मिट्टी में जैविक कार्बन की कमी खेतों की उपज को घटा रही है।

जैविक खाद और वेस्ट डीकंपोजर का नियमित उपयोग जैविक कार्बन की कमी को पूरा कर सकता है।

इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, बल्कि फसलों का उत्पादन भी बेहतर होगा।

मिट्टी के स्वास्थ्य की देखभाल: आपके हाथों में समाधान

मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखना किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

जैविक और रासायनिक उपायों का संयोजन अपनाएं।

नियंत्रित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें।

फसल चक्र को अपनाएं ताकि मिट्टी को हर सीजन नई ऊर्जा मिल सके।