किसान भाइयों के लिए खुशखबरी! अब खेतों की तारबंदी के लिए मिलेगी 60 फीसदी सब्सिडी, जल्दी करें आवेदन

Haryana Kranti, नई दिल्ली: किसानों को अपने खेतों को जंगली जानवरों और बेसहारा जानवरों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए खेतों में तारबंदी करनी पड़ती है। इसमें काफी लागत आती है जो किसान पर अतिरिक्त बोझ है। राजस्थान सरकार किसानों को अपने खेतों में तार लगाने के लिए सब्सिडी देने की योजना बना रही है। इसके तहत किसानों को 400 रनिंग मीटर तक वायरिंग के लिए लघु एवं सीमांत किसानों को लागत का 60 प्रतिशत या अधिकतम 48,000 रुपये (जो भी कम हो) और लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 40,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। सामान्य किसानों को (जो भी कम हो) दी जाती है।
यदि कई किसान सामुदायिक आवेदन में एक साथ तार लगाना चाहते हैं, तो 10 या अधिक किसानों के समूह को लागत का 70 प्रतिशत या अधिकतम 56,000 रुपये (जो भी कम हो) की दर से अनुदान मिल सकता है। न्यूनतम 5 हेक्टेयर. प्रति किसान 400 रनिंग मीटर तक सब्सिडी देय होगी।
आवेदन की शर्तें
इस योजना का लाभ सभी वर्ग के किसानों को दिया जाएगा
व्यक्तिगत और किसान समूहों में आवेदकों के पास एक ही स्थान पर न्यूनतम 1.5 हेक्टेयर भूमि होनी चाहिए
अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में छोटी जोत का आकार होने के कारण एक ही स्थान पर न्यूनतम 0.5 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होती है।
सामुदायिक आवेदन के लिए 10 या अधिक किसानों के समूह में न्यूनतम 5 हेक्टेयर भूमि और एक निर्दिष्ट परिधि में समूह की भूमि की सीमाओं की आवश्यकता होती है।
आवेदन प्रक्रिया
राज किसान साथी जन आधार पोर्टल के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से या निकटतम ई-मित्र केंद्र पर जाकर आवेदन कर सकते हैं
आवेदन पत्र के साथ आवश्यक दस्तावेज: आधार कार्ड, जन आधार कार्ड, जमा राशि की प्रति (छह महीने से अधिक पुरानी नहीं), बैंक खाते से संबंधित विवरण
आवेदन पत्र ऑनलाइन जमा करने की रसीद ऑनलाइन ही प्राप्त होगी
हाइलाइट
केवल उन्हीं किसानों को लघु एवं सीमांत किसान माना जाएगा जिनका सामूहिक आधार पर लघु एवं सीमांत कृषकों की श्रेणी में पंजीकरण (साइडिंग) है और वे अनुदान के लिए पात्र माने जाएंगे। यदि जन आधार में लघु/सीमांत किसानों के पंजीकरण की सुविधा नहीं है तो ऐसी स्थिति में किसानों को आवेदन के समय सक्षम स्तर से जारी लघु/सीमांत का प्रमाण पत्र संलग्न करना होगा।
आवेदन के बाद कृषि विभाग द्वारा वायरिंग लगाने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति जारी की जायेगी. इसकी सूचना मोबाइल संदेश/कृषि पर्यवेक्षक द्वारा दी जायेगी
वायरिंग से पूर्व एवं कार्य पूर्ण होने पर विभाग द्वारा स्पॉट/सत्यापन एवं जियोटैगिंग के पश्चात अनुदान राशि सीधे किसान के खाते में जमा कर दी जायेगी।